कुश आसनी (कुशा आसन) पूजा-पाठ, जप, तर्पण और वैदिक कर्मकांडों में उपयोग की जाने वाली पवित्र घास से बनी आसनी होती है। इसे भूमि पर बिछाकर साधक पूजा करता है। शास्त्रों के अनुसार कुश घास अत्यंत पवित्र मानी जाती है और इस पर बैठकर पूजा करने से शरीर की ऊर्जा सुरक्षित रहती है तथा मन एकाग्र होता है। कुश आसनी का उपयोग विशेष रूप से पितृ पूजा, श्राद्ध, तर्पण, ग्रह शांति, हवन और जप में किया जाता है। यह शुद्धता, संयम और वैदिक परंपरा का प्रतीक है।
कुश आसनी (कुशा आसन) पूजा-पाठ, जप, तर्पण और वैदिक कर्मकांडों में उपयोग की जाने वाली पवित्र घास से बनी आसनी होती है। इसे भूमि पर बिछाकर साधक पूजा करता है। शास्त्रों के अनुसार कुश घास अत्यंत पवित्र मानी जाती है और इस पर बैठकर पूजा करने से शरीर की ऊर्जा सुरक्षित रहती है तथा मन एकाग्र होता है। कुश आसनी का उपयोग विशेष रूप से पितृ पूजा, श्राद्ध, तर्पण, ग्रह शांति, हवन और जप में किया जाता है। यह शुद्धता, संयम और वैदिक परंपरा का प्रतीक है।
Sitting during pooja and japa
Pitru Puja, Shraddha & Tarpan
Grah Shanti and Shanti rituals
Havan and Vedic ceremonies
Meditation and spiritual practices
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